Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

कौन फिज़? कैसा चान्द्!



चाँद पहले फ़िज़ा में गुम था कहीं
हर तरफ़ चाँदनी थी छिटकी हुई।
अब फ़िज़ा से ही गुम हुआ है चाँद
और फ़िज़ा रह गयी बिलखती हुई।

##नक्श्त्र दर्शन चन्दीग.ढ के आकश पर
अस्वीकरण