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चैनल: हाशिमियात


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ब्लॉग्स (17)
वेलेंटाइन डेतितलियों के मौसम में चद्दियां उड़ाई है,कौन आज गर्वित है,किसको शर्म आयी है?घात इतनी अन्दरतक किसने ये लगायी है?संस्कारो की अपने धज्जियां उड़ाई है।रस्म ये नही अपनी,फ़िर भी दिल तो जुड़ते है,रिश्ता तौड़ने वालों कैसी ये लड़ाई है!दिल-जलो की बातों पर किस ... आगे पढ़ें...

बात झूठी है ये सच्चाई तो है,बोल पाना यहीं अच्छाई तो है।क़द न बढ़ पाया कि अवसर न मिले,मुझसे लम्बी मैरी परछाई तो है।दौरे मन्दी में थमी है रफ़्तार,एक बढ़ती हुई महंगाई तो है।कौन हैक्या है? कुछ पता न चला!हम किसी चीज़ की परछाई तो है।ख़ुद-फ़रेबों* की नही भीड़ तो ... आगे पढ़ें...

चाँद पहले फ़िज़ा में गुम था कहींहर तरफ़ चाँदनी थी छिटकी हुई।अब फ़िज़ा से ही गुम हुआ है चाँदऔर फ़िज़ा रह गयी बिलखती हुई।##नक्श्त्र दर्शन चन्दीग.ढ के आकश पर आगे पढ़ें...

उनका आंतक फ़ैलाने का दावा सच्चा था,शायद मैरे घर का दरवाज़ा ही कच्चा था।पूत ने पांव पसारे तो वह दानव बन बैठा,वही पड़ोसी जिसको समझा अपना बच्चा था।नाग लपैटे आये थे वो अपने जिस्मो पर,हाथो में हमने देखा फूलो का गुच्छा था।तौड़ दो सर उसका, इसके पहले कि वह डस ले,इसके ... आगे पढ़ें...


शम्मी कपूरएक समय में अरब मुल्को में खासकर लेबनान,जोर्डन ,कुवैत वगेरह में शम्मी कपूर का जादू चलता था। जंगली वाला ज़माना था वह। याहूँ तो यहाँ खूब गूंजा, सिर्फ़ नौजवानों में ही नही सब तबको में। याहूँ काल की यादगार आज भी पुराने लोगों के दिलो में स्थापित है। ... आगे पढ़ें...

पारदर्शिताशीशे के मकानो मे हम बैठे हुए है, पारदर्शिता का इससे अच्छा प्रतीकऔर क्या होगा?कुछ भी तो नही छुपा रहे है हम्। हमारी भौतिक अवस्था (उज्जवल कपड़ोसे सुसज्जित तन) हमारे निष्कपट मन का प्रतीक नही?हम पर पत्थर मत फ़ेंकिये श्रीमान! हाँ, काग़ज़ के कुछ बण्डल ... आगे पढ़ें...

"आत्म-मन्थन""उधार का ख़्याल"* है?नगद तेरा हिसाब कर्।भले हो बात बे-तुकी,छपा दे तू ब्लाग पर्।समझ न पाए गर कोई,सवाल कर,जवाब भर्।न तर्क कर वितर्क कर,जो लिख दिया किताब कर्।न मिल सके क्मेन्टस तो,तू खुद से दस्तयाब* कर्।तू छप के क्युं छुपा रहे,न हाशमी हिजाब* ... आगे पढ़ें...

मरहमनही अच्छा लगा तुमको इबादतगाह ढह जाना,तुम्हारे हमवतन लोगो का यूं ख़ामोश रह जाना,वतन के हुक्मरानो से रखी वाबस्ता उम्मीदें,जो थी लाचार या अचरज से उसका दंग रह जाना!हुकुमत दंग थी दंगो में शामिल लोग हो बैठे,जो कल तक भाई से रह्ते थे, ... आगे पढ़ें...

मरहमनही अच्छा लगा तुमको इबादतगाह ढह जाना,तुम्हारे हमवतन लोगो का यूं ख़ामोश रह जाना,वतन के हुक्मरानो से रखी वाबस्ता उम्मीदें,जो थी लाचार या अचरज से उसका दंग रह जाना!हुकुमत दंग थी दंगो में शामिल लोग हो बैठे,जो कल तक भाई से रह्ते थे, ... आगे पढ़ें...

यथार्थवदिताआप-साहब, श्रीमान, जनाब, महाशय और शिष्टाचारी रूपी सारे वह शब्दहम त्याग दे जिसे बोलते समय हमारा आशय सद नही होता। सदाशयताका विलोप तो जाने कब से हो गया। क्यों न हम यथार्थवादी बन सचमुचजो शब्द हमारी सोच में है, ... आगे पढ़ें...

शिष्टतासर उठाये रखने की स्थिति मनुष्य को गर्वानुभाव कराती है,फिर वह चाहे जूते पर पाँलिश करवाते समय किसी युवक या अबोध बालक केसामने लकड़ी के तख़्ते पर पाँव रखने की अवस्था में ही सर क्यों नउठाना पड़ रहा हो। उस समय नीचे देखना आपको कम ही रूचिकरलगेगा!अब जबकि ... आगे पढ़ें...


स्वयंनियति कि उत्पत्ती ?दो विपरीत तत्वो का सम्मिश्रन!वासना की उपज ??प्रेम का प्रतिफ़ल!! याआल्हाद का जमा हुआ क्षण!!! …हाँ, शायद्…कोई ऐसा जमा हुआ क्षण् ही हूँ मै,जो भौतिक रूप मेँ अभिव्यक्त हो गया हुँ।मगर मैरी भौतिकता कि इस अभिव्यक्ति ... आगे पढ़ें...

साथीतू ही तशना-लब है साथी,मुझे क्या पिलाएगी तू ?तेरा जाम तो है टूटा,मुझे क्या रिझाएगी तू ?तू बुझी हुई है ख़ुद भी,मुझे क्या जलाएगी तू?तेरा साज़ सूना-सूना,तेरा नग़्मा ग़म-रसीदा,तेरी ज़ुल्फ़ भी परीशाँ,तेरी बज्म वीराँ-वीराँ…यूँ लगे कि जैसे ... आगे पढ़ें...

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