वेलेंटाइन डेतितलियों के मौसम में चद्दियां उड़ाई है,कौन आज गर्वित है,किसको शर्म आयी है?घात इतनी अन्दरतक किसने ये लगायी है?संस्कारो की अपने धज्जियां उड़ाई है।रस्म ये नही अपनी,फ़िर भी दिल तो जुड़ते है,रिश्ता तौड़ने वालों कैसी ये लड़ाई है!दिल-जलो की बातों पर किस ... आगे पढ़ें...
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 बात झूठी है ये सच्चाई तो है,बोल पाना यहीं अच्छाई तो है।क़द न बढ़ पाया कि अवसर न मिले,मुझसे लम्बी मैरी परछाई तो है।दौरे मन्दी में थमी है रफ़्तार,एक बढ़ती हुई महंगाई तो है।कौन हैक्या है? कुछ पता न चला!हम किसी चीज़ की परछाई तो है।ख़ुद-फ़रेबों* की नही भीड़ तो ... आगे पढ़ें...
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बस्ती जब बाज़ार बन गयी,हस्ती भी व्यापार बन गयी।भिन्न,विभिन्न मतो से चुन कर,त्रिशन्कु सरकार बन गयी।लाख टके की बात सुनी थी,सुन्दर नैनो कार बन गयी।अपनी ही लापरवाही तो,आतंक का हथयार बन गयी।लोक-तन्त्र की जय-जय,जय हो,राजनीति घर-बार बन गयी।-मन्सूर अली हाशमी आगे पढ़ें...
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चाँद पहले फ़िज़ा में गुम था कहींहर तरफ़ चाँदनी थी छिटकी हुई।अब फ़िज़ा से ही गुम हुआ है चाँदऔर फ़िज़ा रह गयी बिलखती हुई।##नक्श्त्र दर्शन चन्दीग.ढ के आकश पर आगे पढ़ें...
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उनका आंतक फ़ैलाने का दावा सच्चा था,शायद मैरे घर का दरवाज़ा ही कच्चा था।पूत ने पांव पसारे तो वह दानव बन बैठा,वही पड़ोसी जिसको समझा अपना बच्चा था।नाग लपैटे आये थे वो अपने जिस्मो पर,हाथो में हमने देखा फूलो का गुच्छा था।तौड़ दो सर उसका, इसके पहले कि वह डस ले,इसके ... आगे पढ़ें...
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अथ श्री बन्दर कथानित्यानुसार आज भी अपने घर की छत पर बैठा ब्लाँग रच रहा था कि बहुत दिनो बाद बंदर-दर्शन हुए। समीर लाल जी की अथ श्री बंदर कथा के बाद से ही यह ग़ायब था। मैं आशचर्य चकित हुवा उसके हाथ में काग़ज़-कलम देख कर! और सह्सा संबोधित भी कर बैठा, मानव जान कर ... आगे पढ़ें...
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dnesday, September 17, 2008 amitabhbachchan.jpga... आगे पढ़ें...
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शम्मी कपूरएक समय में अरब मुल्को में खासकर लेबनान,जोर्डन ,कुवैत वगेरह में शम्मी कपूर का जादू चलता था। जंगली वाला ज़माना था वह। याहूँ तो यहाँ खूब गूंजा, सिर्फ़ नौजवानों में ही नही सब तबको में। याहूँ काल की यादगार आज भी पुराने लोगों के दिलो में स्थापित है। ... आगे पढ़ें...
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बे-लाग हो ब्लॉग तो लोगों को लगेगा,उतरेगा यूं गले की निगलते ही बनेगा,बातें गुलाब की हो या गल-बहियों की रातें,ग़ालिब भी हमें एक ब्लॉगर ही लगेगा।क हाँ-कहाँ पे छुपा है ब्लॉग धूँदेंगे,जहाँ-जहाँ भी छपा है ब्लॉग धूँदेंगे,महक की सिम्त बढेंगे गुलाब धूँदेंगे,छुपे ... आगे पढ़ें...
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कोई इसको भडास कहता है,कोई मुखवास इसको कहता है,है किसी के लिए विचार की बात,कोई इसको अचार कहता है।चोट दिल पर लगी ब्लॉग बना,खोट से मन दुखा ब्लॉग बना,ज्योत की लौ बढ़ी ब्लॉग बना,मौत की आगही॥ ब्लॉग बना ।पहले बन-बन के मन में मिटता था,अब तो बनने से पहले छपता ... आगे पढ़ें...
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[मिस्र और इस्राइल से लौट कर कुछ नये मूल्यो का जायज़ा लिया है,हाज़िर है:-]……"झूटा-सच"Fals... आगे पढ़ें...
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पारदर्शिताशीशे के मकानो मे हम बैठे हुए है, पारदर्शिता का इससे अच्छा प्रतीकऔर क्या होगा?कुछ भी तो नही छुपा रहे है हम्। हमारी भौतिक अवस्था (उज्जवल कपड़ोसे सुसज्जित तन) हमारे निष्कपट मन का प्रतीक नही?हम पर पत्थर मत फ़ेंकिये श्रीमान! हाँ, काग़ज़ के कुछ बण्डल ... आगे पढ़ें...
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अर्द्ध-सत्य राजनैतिक पार्टिया अभि-भाषको (वकीलो) के माधयम से जनता कोसंबोधित कर रही है। वैसे तो राजनितिझ स्व्यं चतुराई से परिपूर्णहोते है,फिर वह अभि-भाषक भी हुए तो (जो कि अच्छे-अच्छे विद्वानमहामाहिम जज साहिबान को भी अपनी तर्क-संगत शैली से ... आगे पढ़ें...
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"आत्म-मन्थन""उधार का ख़्याल"* है?नगद तेरा हिसाब कर्।भले हो बात बे-तुकी,छपा दे तू ब्लाग पर्।समझ न पाए गर कोई,सवाल कर,जवाब भर्।न तर्क कर वितर्क कर,जो लिख दिया किताब कर्।न मिल सके क्मेन्टस तो,तू खुद से दस्तयाब* कर्।तू छप के क्युं छुपा रहे,न हाशमी हिजाब* ... आगे पढ़ें...
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मरहमनही अच्छा लगा तुमको इबादतगाह ढह जाना,तुम्हारे हमवतन लोगो का यूं ख़ामोश रह जाना,वतन के हुक्मरानो से रखी वाबस्ता उम्मीदें,जो थी लाचार या अचरज से उसका दंग रह जाना!हुकुमत दंग थी दंगो में शामिल लोग हो बैठे,जो कल तक भाई से रह्ते थे, ... आगे पढ़ें...
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