भावना-शून्यता!इससे पहले कि भुजा पर मैरी,अध-खुली उसकी कमर सट जाती,तेज़ झटको से उछलती बस में,आँच मर्यादा पे उसके आती!ऐसा होने न दिया,खुद को संभाल लिया,बस उछलती ही रही - वोह संभलती ही रही।मे था संभला ही हुआ…अपनी मर्यादा मे सिमटे-सिमटे ?उसकी मर्यादा बचाने के ...
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