Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

टैग्स: विविध


ब्लॉग्स (23)
वेलेंटाइन डेतितलियों के मौसम में चद्दियां उड़ाई है,कौन आज गर्वित है,किसको शर्म आयी है?घात इतनी अन्दरतक किसने ये लगायी है?संस्कारो की अपने धज्जियां उड़ाई है।रस्म ये नही अपनी,फ़िर भी दिल तो जुड़ते है,रिश्ता तौड़ने वालों कैसी ये लड़ाई है!दिल-जलो की बातों पर किस ... आगे पढ़ें...

बात झूठी है ये सच्चाई तो है,बोल पाना यहीं अच्छाई तो है।क़द न बढ़ पाया कि अवसर न मिले,मुझसे लम्बी मैरी परछाई तो है।दौरे मन्दी में थमी है रफ़्तार,एक बढ़ती हुई महंगाई तो है।कौन हैक्या है? कुछ पता न चला!हम किसी चीज़ की परछाई तो है।ख़ुद-फ़रेबों* की नही भीड़ तो ... आगे पढ़ें...

बस्ती जब बाज़ार बन गयी,हस्ती भी व्यापार बन गयी।भिन्न,विभिन्न मतो से चुन कर,त्रिशन्कु सरकार बन गयी।लाख टके की बात सुनी थी,सुन्दर नैनो कार बन गयी।अपनी ही लापरवाही तो,आतंक का हथयार बन गयी।लोक-तन्त्र की जय-जय,जय हो,राजनीति घर-बार बन गयी।-मन्सूर अली हाशमी आगे पढ़ें...